श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  4.25.33-34h 
तादृशं वालिन: क्षिप्रं प्राकुर्वन्नौर्ध्वदेहिकम्।
अङ्गदं परिरभ्याशु तारप्रभृतयस्तदा॥ ३३॥
क्रोशन्त: प्रययु: सर्वे वानरा हतबान्धवा:।
 
 
अनुवाद
तब तारा आदि वानरों ने शीघ्रतापूर्वक वालि के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। जिन वानरों के सम्बन्धी मारे गए थे, वे सब अंगद को गले लगाकर, शव को लेकर रोते हुए वहाँ से चले गए।
 
Then the monkeys like Tara etc. quickly arranged for the last rites of Vaali. All the monkeys whose relatives had been killed, embraced Aangada and quickly left the place crying with the corpse.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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