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ramayan 4.25.31: आगे-आगे बहुत से वानर नाना प्रकार के रत्न बाँटते हुए चल रहे थे। उनके पीछे-पीछे रथ चल रहा था।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.25.31 
विश्राणयन्तो रत्नानि विविधानि बहूनि च।
अग्रत: प्लवगा यान्तु शिबिका तदनन्तरम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
आगे-आगे बहुत से वानर नाना प्रकार के रत्न बाँटते हुए चल रहे थे। उनके पीछे-पीछे रथ चल रहा था।
 
‘Ahead walked many monkeys, giving away many gems of various kinds. Behind them walked the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)