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ramayan 4.25.26: वह चारों ओर से नाना प्रकार के पुष्पों के गुच्छों से ढका हुआ था और प्रातःकाल के सूर्य के समान चमकने वाली कमल मालाओं से सुशोभित था॥26॥   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.25.26 
पुष्पौघै: समभिच्छन्नां पद्ममालाभिरेव च।
तरुणादित्यवर्णाभिर्भ्राजमानाभिरावृताम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह चारों ओर से नाना प्रकार के पुष्पों के गुच्छों से ढका हुआ था और प्रातःकाल के सूर्य के समान चमकने वाली कमल मालाओं से सुशोभित था॥26॥
 
It was covered on all sides by clusters of flowers of various types and was decorated with lotus garlands shining like the morning sun. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)