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ramayan 4.25.24: कारीगरों ने उस पालकी को बहुत सुंदर बनाने की कोशिश की थी। उसका हर एक हिस्सा बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया था। वह आकार में बहुत बड़ी थी। उसमें लकड़ी के खेल के पहाड़ बने हुए थे। उसे सुंदर कारीगरी से सजाया गया था।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.25.24 
सुनियुक्तां विशालां च सुकृतां शिल्पिभि: कृताम्।
दारुपर्वतकोपेतां चारुकर्मपरिष्कृताम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कारीगरों ने उस पालकी को बहुत सुंदर बनाने की कोशिश की थी। उसका हर एक हिस्सा बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया था। वह आकार में बहुत बड़ी थी। उसमें लकड़ी के खेल के पहाड़ बने हुए थे। उसे सुंदर कारीगरी से सजाया गया था।
 
The artisans had tried to make that palanquin very beautiful. Each and every part of it was made very well. It was very big in size. It had wooden play-mountains made in it. It was decorated with beautiful craftsmanship.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)