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ramayan 4.25.21: वहाँ से तारा तुरन्त ही रथ को लेकर लौट आयी, जिसे रथ ले जाने में समर्थ वीर वानरों ने अपने कंधों पर रख लिया।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.25.21 
आदाय शिबिकां तार: स तु पर्यापतत् पुन:।
वानरैरुह्यमानां तां शूरैरुद्वहनोचितै:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से तारा तुरन्त ही रथ को लेकर लौट आयी, जिसे रथ ले जाने में समर्थ वीर वानरों ने अपने कंधों पर रख लिया।
 
From there Tara immediately returned, carrying the chariot carried on the shoulders of valiant monkeys capable of carrying the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)