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ramayan 4.25.19: सुग्रीव से ऐसा कहकर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले सुमित्रानन्दन लक्ष्मण अपने भाई के पास जाकर खड़े हो गए।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.25.19 
एवमुक्त्वा तु सुग्रीवं सुमित्रानन्दवर्धन:।
तस्थौ भ्रातृसमीपस्थो लक्ष्मण: परवीरहा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव से ऐसा कहकर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले सुमित्रानन्दन लक्ष्मण अपने भाई के पास जाकर खड़े हो गए।
 
Saying this to Sugriva, Sumitranandan Lakshman, the destroyer of enemy warriors, went and stood near his brother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)