श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.24.8 
न त्वा जिघांसामि चरेति यन्मा-
मयं महात्मा मतिमानुवाच।
तस्यैव तद् राम वचोऽनुरूप-
मिदं वच: कर्म च मेऽनुरूपम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के समय बुद्धिमान ऋषि बालि ने मुझसे कहा था कि, 'तुम चले जाओ, मैं तुम्हारे प्राण नहीं लेना चाहता।' श्री राम! उन्होंने यही कहा था और आपसे कहकर मैंने जो क्रूर वचन और कर्म करके उन्हें मरवाया, वे मेरे अनुकूल हैं।॥8॥
 
The wise sage Vali had said to me during the war, 'You go away, I do not want to take your life'. Shri Ram! This was what he said and the cruel words and deeds that I got him killed by asking you are in accordance with me.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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