Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.24.44: शत्रुओं को पीड़ा देने वाले परम प्रभावशाली महात्मा श्री राम ने जब उन्हें इस प्रकार सान्त्वना दी, तब वीर तारा की सुन्दर एवं मनोहर पत्नी, जिसके मुख से निरन्तर विलाप की ध्वनि निकल रही थी, शान्त हो गयी - उसने रोना-पीटना बन्द कर दिया। | ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रुओं को पीड़ा देने वाले परम प्रभावशाली महात्मा श्री राम ने जब उन्हें इस प्रकार सान्त्वना दी, तब वीर तारा की सुन्दर एवं मनोहर पत्नी, जिसके मुख से निरन्तर विलाप की ध्वनि निकल रही थी, शान्त हो गयी - उसने रोना-पीटना बन्द कर दिया।
When the most influential saint Sri Ram, who torments his enemies, consoled him in this manner, the beautiful and beautiful wife of the heroic Tara, whose mouth was constantly uttering lamentations, became quiet - she stopped weeping and wailing.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे चतुर्विंश: सर्ग:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥