श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.24.42 
तं चैव सर्वं सुखदु:खयोगं
लोकोऽब्रवीत् तेन कृतं विधात्रा।
त्रयोऽपि लोका विहितं विधानं
नातिक्रमन्ते वशगा हि तस्य॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
‘विधाता ने इस सम्पूर्ण जगत को सुख-दुःख से परिपूर्ण बनाया है। यह बात सामान्य मनुष्य भी जानते और कहते हैं। तीनों लोकों के प्राणी विधाता के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकते, क्योंकि सभी उसके अधीन हैं।॥ 42॥
 
‘The Creator has made this entire world full of happiness and sorrow. Even ordinary people know and say this. The creatures of the three worlds cannot violate the laws of the Creator because everyone is under his control.॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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