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श्लोक 4.24.41  |
इत्येवमुक्तस्तु विभुर्महात्मा
तारां समाश्वास्य हितं बभाषे।
मा वीरभार्ये विमतिं कुरुष्व
लोको हि सर्वो विहितो विधात्रा॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| तारा के ऐसा कहने पर महात्मा भगवान् श्री राम ने उसे आश्वासन देते हुए हितकर बात कही - 'वीर पत्नी! तुम्हें मृत्यु के विषय में नकारात्मक विचार त्याग देना चाहिए; क्योंकि विधाता ने ही इस सम्पूर्ण जगत् की रचना की है। 41॥ |
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| When Tara said this, Mahatma Lord Shri Ram assured her and said something beneficial - 'Brave wife! You should give up the negative thoughts about death; Because the Creator has created this entire world. 41॥ |
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