श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  4.24.39 
त्वं चापि मां तस्य मम प्रियस्य
प्रदास्यसे धर्ममवेक्ष्य वीर।
अनेन दानेन न लप्स्यसे त्व-
मधर्मयोगं मम वीर घातात्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! यदि तुम भी धर्म का ध्यान रखते हुए मुझे मेरे प्रिय बालि को समर्पित कर दोगे, तो इस दान के प्रभाव से मुझे मारने पर भी तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा॥ 39॥
 
Valiant warrior! If you too, keeping an eye on Dharma, surrender me to my beloved Vali, then due to the effect of this donation, you will not incur any sin even if you kill me.॥ 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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