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श्लोक 4.24.36  |
त्वं वेत्थ तावद् वनिताविहीन:
प्राप्नोति दु:खं पुरुष: कुमार:।
तत् त्वं प्रजानञ्जहि मां न वाली
दु:खं ममादर्शनजं भजेत॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| आप भलीभाँति जानते हैं कि बिना पत्नी के युवक को कैसा दुःख सहना पड़ता है। इस बात को समझकर आप मुझे मार डालें, जिससे बालि को मेरे वियोग का दुःख न सहना पड़े॥ 36॥ |
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| You know very well the pain that a young man has to bear without a wife. Understanding this fact, you should kill me so that Vali does not have to suffer the pain of my separation.॥ 36॥ |
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