Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.24.35: 'वालि स्वर्ग में भी मेरे बिना दुःखी होगा और उसके शरीर की कांति फीकी पड़ जाएगी। वह उसी प्रकार दुःखी होगा, जैसे तुम गिरिराज ऋष्यमूक के सुन्दर तट पर विदेहनन्दिनी सीता के बिना दुःखी हो रहे हो।' | ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वर्गेऽपि शोकं च विवर्णतां च
मया विना प्राप्स्यति वीर वाली।
रम्ये नगेन्द्रस्य तटावकाशे
विदेहकन्यारहितो यथा त्वम्॥ ३५॥
अनुवाद
'वालि स्वर्ग में भी मेरे बिना दुःखी होगा और उसके शरीर की कांति फीकी पड़ जाएगी। वह उसी प्रकार दुःखी होगा, जैसे तुम गिरिराज ऋष्यमूक के सुन्दर तट पर विदेहनन्दिनी सीता के बिना दुःखी हो रहे हो।'
‘Vali, even in heaven, will feel sad without me and the radiance of his body will fade. He will be sad in the same way as you feel pain without Videhanandini Sita on the beautiful banks of Giriraj Rishyamuka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥