श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.24.33 
येनैव बाणेन हत: प्रियो मे
तेनैव बाणेन हि मां जहीहि।
हता गमिष्यामि समीपमस्य
न मां विना वीर रमेत वाली॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
(अतः मैं प्रार्थना करती हूँ कि) आप मुझे उसी बाण से मार डालें जिससे आपने मेरे प्रिय पति को मारा है। मरकर मैं उनके पास जाऊँगी। वीर! मेरे बिना बालि कहीं भी सुखी नहीं रह सकेगा॥ 33॥
 
(‘Therefore I pray that) you kill me with the same arrow with which you killed my beloved husband. After dying I will go to him. Brave! Without me Vali will not be able to be happy anywhere.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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