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ramayan 4.24.29: उस समय महान् संकट में पड़ी हुई तथा शोक से पीड़ित हुई आर्या तारा अत्यन्त तीव्र गति से चली और गिरती हुई भगवान राम के पास जा गिरी, जो महेन्द्र के समान ही पराजित करने में कठिन महारथी थे।   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.24.29 
तस्येन्द्रकल्पस्य दुरासदस्य
महानुभावस्य समीपमार्या।
आर्तातितूर्णं व्यसनं प्रपन्ना
जगाम तारा परिविह्वलन्ती॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उस समय महान् संकट में पड़ी हुई तथा शोक से पीड़ित हुई आर्या तारा अत्यन्त तीव्र गति से चली और गिरती हुई भगवान राम के पास जा गिरी, जो महेन्द्र के समान ही पराजित करने में कठिन महारथी थे।
 
At that time, Arya Tara, who was in great trouble and grief-stricken, went very fast, falling down and falling down to Lord Rama, a great hero who was as difficult to defeat as Mahendra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)