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ramayan 4.24.27: जब तारा को उसके पति के पास से हटाया जा रहा था, तो वह बार-बार उनसे लिपटकर अपने को छुड़ाने के लिए छटपटाने लगी। तभी उसने देखा कि धनुष-बाण लिए श्रीराम उसके सामने खड़े हैं, जो अपने तेज से सूर्यदेव के समान चमक रहे थे।   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.24.27 
सा विस्फुरन्ती परिरभ्यमाणा
भर्तु: समीपादपनीयमाना।
ददर्श रामं शरचापपाणिं
स्वतेजसा सूर्यमिव ज्वलन्तम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब तारा को उसके पति के पास से हटाया जा रहा था, तो वह बार-बार उनसे लिपटकर अपने को छुड़ाने के लिए छटपटाने लगी। तभी उसने देखा कि धनुष-बाण लिए श्रीराम उसके सामने खड़े हैं, जो अपने तेज से सूर्यदेव के समान चमक रहे थे।
 
When Tara was being removed from her husband's side, she started struggling to free herself, embracing him again and again. Just then she saw Shri Ram standing in front of her with a bow and arrow, who was shining like the Sun God with his brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)