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ramayan 4.24.2: उनके मुख से आँसुओं की धारा बहने लगी। उनका मन दुःखी हो गया और भीतर ही भीतर पीड़ा अनुभव करते हुए वे सेवकों के साथ धीरे-धीरे श्री रामचन्द्रजी के पास गए।   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.24.2 
स बाष्पपूर्णेन मुखेन पश्यन्
क्षणेन निर्विण्णमना मनस्वी।
जगाम रामस्य शनै: समीपं
भृत्यैर्वृत: सम्परिदूयमान:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उनके मुख से आँसुओं की धारा बहने लगी। उनका मन दुःखी हो गया और भीतर ही भीतर पीड़ा अनुभव करते हुए वे सेवकों के साथ धीरे-धीरे श्री रामचन्द्रजी के पास गए।
 
A stream of tears started flowing down his face. His mind became sad and feeling pain within, he slowly went to Shri Ramchandraji with his servants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)