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ramayan 4.24.16: मैंने ऐसा पाप किया है जो संसार द्वारा निन्दित है, नीच मनुष्यों के योग्य है और सम्पूर्ण जगत के लिए हानिकारक है। जैसे वर्षा का जल नीचे की ओर बहता है, वैसे ही मेरे भाई की हत्या से उत्पन्न यह महान शोक मुझ पर सब ओर से आक्रमण कर रहा है॥ 16॥   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.24.16 
पापस्य कर्तास्मि विगर्हितस्य
क्षुद्रस्य लोकापकृतस्य लोके।
शोको महान् मामभिवर्ततेऽयं
वृष्टेर्यथा निम्नमिवाम्बुवेग:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैंने ऐसा पाप किया है जो संसार द्वारा निन्दित है, नीच मनुष्यों के योग्य है और सम्पूर्ण जगत के लिए हानिकारक है। जैसे वर्षा का जल नीचे की ओर बहता है, वैसे ही मेरे भाई की हत्या से उत्पन्न यह महान शोक मुझ पर सब ओर से आक्रमण कर रहा है॥ 16॥
 
I have committed a sin which is condemned by the world, which is worthy of lowly men and which is harmful to the entire world. Just as the force of rainwater flows towards the lowlands, similarly this great grief caused by the murder of my brother is attacking me from all sides.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)