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ramayan 4.24.14: पृथ्वी, जल, वृक्ष और स्त्रियाँ इन्द्र के पापों को सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं; किन्तु मुझ जैसे वानर के पापों को कौन स्वीकार करना चाहेगा? अथवा कौन उन्हें स्वीकार कर सकेगा?॥14॥   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.24.14 
पाप्मानमिन्द्रस्य मही जलं च
वृक्षाश्च कामं जगृहु: स्त्रियश्च।
को नाम पाप्मानमिमं सहेत
शाखामृगस्य प्रतिपत्तुमिच्छेत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, जल, वृक्ष और स्त्रियाँ इन्द्र के पापों को सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं; किन्तु मुझ जैसे वानर के पापों को कौन स्वीकार करना चाहेगा? अथवा कौन उन्हें स्वीकार कर सकेगा?॥14॥
 
The earth, water, trees and women willingly accepted the sins of Indra; but who would want to accept the sins of a monkey like me? Or who will be able to accept them?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)