श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.24.12 
भ्रातृत्वमार्यभावश्च धर्मश्चानेन रक्षित:।
मया क्रोधश्च कामश्च कपित्वं च प्रदर्शितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उसने भाईचारे की भावना, साधुभाव और धर्म की रक्षा की है; परंतु मैंने तो केवल काम, क्रोध और वानर-सी चंचलता ही प्रकट की है॥12॥
 
He has protected the feeling of brotherhood, the feeling of being a saint and the Dharma as well; but I have only displayed lust, anger and the ape-like fickleness.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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