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ramayan 4.24.10: 'वालि का मुझे मारने का कोई इरादा नहीं था, क्योंकि उसे भय था कि इससे उसकी कीर्ति धूमिल हो जाएगी। मेरा अपना मन पाप से भरा हुआ था, जिसके कारण मैंने अपने भाई के प्रति ऐसा अपराध किया जो उसके लिए घातक सिद्ध हुआ।॥10॥   |   ramayan सर्ग 4.24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 24: सुग्रीव का शोकमग्न होकर श्रीराम से प्राणत्याग के लिये आज्ञा माँगना, तारा का श्रीराम से अपने वध के लिये प्रार्थना करना और श्रीराम का उसे समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.24.10 
वधो हि मे मतो नासीत् स्वमाहात्म्यव्यतिक्रमात्।
ममासीद् बुद्धिदौरात्म्यात् प्राणहारी व्यतिक्रम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'वालि का मुझे मारने का कोई इरादा नहीं था, क्योंकि उसे भय था कि इससे उसकी कीर्ति धूमिल हो जाएगी। मेरा अपना मन पाप से भरा हुआ था, जिसके कारण मैंने अपने भाई के प्रति ऐसा अपराध किया जो उसके लिए घातक सिद्ध हुआ।॥10॥
 
‘Vaali had no intention of killing me because he feared that this would tarnish his reputation. My own mind was filled with evil, due to which I committed such a crime against my brother that proved fatal for him.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)