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ramayan 4.23.7-8h: हे मेरे प्रिय, हे पवित्र और शक्तिशाली कुल में जन्म लेने वाले, युद्धप्रिय और पर-सम्मान करने वाले! मुझ अनाथ को अकेला छोड़कर तुम कहाँ चले गए?॥7 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.23: तारा का विलाप   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 23: तारा का विलाप  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  4.23.7-8h 
विशुद्धसत्त्वाभिजन प्रिययुद्ध मम प्रिय॥ ७॥
मामनाथां विहायैकां गतस्त्वमसि मानद।
 
 
अनुवाद
हे मेरे प्रिय, हे पवित्र और शक्तिशाली कुल में जन्म लेने वाले, युद्धप्रिय और पर-सम्मान करने वाले! मुझ अनाथ को अकेला छोड़कर तुम कहाँ चले गए?॥7 1/2॥
 
My dear one, born in a pure and powerful family, who loves war and respects others! Where did you go, leaving me, an orphan, alone?॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)