| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 23: तारा का विलाप » श्लोक 6-7h |
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| | | | श्लोक 4.23.6-7h  | इदं तद् वीरशयनं तत्र शेषे हतो युधि॥ ६॥
शायिता निहता यत्र त्वयैव रिपव: पुरा। | | | | | | अनुवाद | | यह वही वीरों का बिस्तर है जिस पर तुमने पूर्वकाल में अनेक शत्रुओं को मारकर उन्हें सुला दिया था, किन्तु आज स्वयं युद्ध में मारे जाने के पश्चात् तुम इस पर सो रहे हो। | | | | This is the same bed of heros on which you had killed many enemies in the past and put them to sleep, but today, after being killed in the war yourself, you are sleeping on it. | | ✨ ai-generated | | |
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