श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 23: तारा का विलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.23.3 
मत्त: प्रियतरा नूनं वानरेन्द्र मही तव।
शेषे हि तां परिष्वज्य मां च न प्रतिभाषसे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे वानरराज! यह पृथ्वी तुम्हें मुझसे भी अधिक प्रिय है। इसीलिए तुम इसे गले लगाकर सो रहे हो और मुझसे बात भी नहीं कर रहे हो॥3॥
 
O King of Monkeys! This Earth is certainly dearer to you than me. That is why you are sleeping while embracing it and are not even talking to me.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)