| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 23: तारा का विलाप » श्लोक 26 |
|
| | | | श्लोक 4.23.26  | अहं पुत्रसहाया त्वामुपासे गतचेतनम्।
सिंहेन पातितं सद्यो गौ: सवत्सेव गोवृषम्॥ २६॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे सिंह द्वारा मारे हुए बैल के पास गाय और उसका बछड़ा खड़ा रहता है, वैसे ही मैं भी अपने पुत्र सहित प्राणहीन होकर भी आपकी सेवा में बैठा हूँ॥ 26॥ | | | | Just as a cow and her calf stand beside a bull killed by a lion, similarly I, along with my son, am sitting in your service even though I am lifeless.॥ 26॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|