श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 23: तारा का विलाप  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  4.23.14-15h 
रेणुशोणितसंवीतं गात्रं तव समन्तत:॥ १४॥
परिरब्धुं न शक्नोमि भुजाभ्यां प्लवगर्षभ।
 
 
अनुवाद
‘हे वानरश्रेष्ठ! तुम्हारा सारा शरीर धूल और रक्त से लिपटा हुआ है; इसलिए मैं तुम्हें अपनी दोनों भुजाओं से आलिंगन करने में असमर्थ हूँ।
 
‘O best of the monkeys! Your whole body is covered with dust and blood; that is why I am unable to embrace you with my two arms.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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