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ramayan 4.23.11-12h: नमस्कार! जो मेरे मित्र, स्वामी, स्वभाव से मेरे प्रिय तथा युद्ध में महान पराक्रम दिखाने वाले शूरवीर थे, वे इस संसार से चले गए॥11 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.23: तारा का विलाप   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 23: तारा का विलाप  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  4.23.11-12h 
सुहृच्चैव च भर्ता च प्रकृत्या च मम प्रिय:॥ ११॥
प्रहारे च पराक्रान्त: शूर: पञ्चत्वमागत:।
 
 
अनुवाद
नमस्कार! जो मेरे मित्र, स्वामी, स्वभाव से मेरे प्रिय तथा युद्ध में महान पराक्रम दिखाने वाले शूरवीर थे, वे इस संसार से चले गए॥11 1/2॥
 
Hi! He who was my friend, master and dear to me by nature and was a brave man who displayed great bravery in battle, passed away from this world. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)