Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.23.10-11h: ‘निश्चय ही मेरा यह कठोर हृदय लोहे का बना है। इसीलिए अपने स्वामी को मारा हुआ देखकर यह सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूटता॥ 10 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.23: तारा का विलाप   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 23: तारा का विलाप  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  4.23.10-11h 
अश्मसारमयं नूनमिदं मे हृदयं दृढम्॥ १०॥
भर्तारं निहतं दृष्ट्वा यन्नाद्य शतधा कृतम्।
 
 
अनुवाद
‘निश्चय ही मेरा यह कठोर हृदय लोहे का बना है। इसीलिए अपने स्वामी को मारा हुआ देखकर यह सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूटता॥ 10 1/2॥
 
‘Surely this hard heart of mine is made of iron. That is why it does not break into hundreds of pieces on seeing its master killed.॥ 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)