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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 23: तारा का विलाप
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श्लोक 1
श्लोक
4.23.1
तत: समुपजिघ्रन्ती कपिराजस्य तन्मुखम्।
पतिं लोकश्रुता तारा मृतं वचनमब्रवीत्॥ १॥
अनुवाद
उस समय प्रसिद्ध तारा वानरराज का मुख सूँघकर रो पड़ी और अपने मृत पति से इस प्रकार कहने लगी-॥1॥
At that time the famous Tara, smelling the face of the King of the Monkeys, wept and said this to her dead husband -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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