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ramayan 4.22.7: हे वीर राजा! यद्यपि इस स्थिति में मैं जो कुछ कहता हूँ, वह करना कठिन है, फिर भी तुम्हें वह अवश्य करना चाहिए।   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.22.7 
अस्यां त्वहमवस्थायां वीर वक्ष्यामि यद् वच:।
यद्यप्यसुकरं राजन् कर्तुमेव त्वमर्हसि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे वीर राजा! यद्यपि इस स्थिति में मैं जो कुछ कहता हूँ, वह करना कठिन है, फिर भी तुम्हें वह अवश्य करना चाहिए।
 
Valiant king! Although whatever I say in this condition is difficult to do, you must do it. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)