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ramayan 4.22.28-29: 'उसने महाबली गोलभ नामक गंधर्व को महान युद्ध का अवसर दिया था। वह युद्ध पंद्रह वर्षों तक निरन्तर चलता रहा। वह न दिन में बंद हुआ, न रात्रि में। 29॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  4.22.28-29 
येन दत्तं महद् युद्धं गन्धर्वस्य महात्मन:॥ २८॥
गोलभस्य महाबाहोर्दश वर्षाणि पञ्च च।
नैव रात्रौ न दिवसे तद् युद्धमुपशाम्यति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'उसने महाबली गोलभ नामक गंधर्व को महान युद्ध का अवसर दिया था। वह युद्ध पंद्रह वर्षों तक निरन्तर चलता रहा। वह न दिन में बंद हुआ, न रात्रि में। 29॥
 
‘He had given the opportunity of a great war to the great Gandharva named Golabha, who was very powerful. That war continued continuously for fifteen years. It was closed neither during the day nor at night. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)