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ramayan 4.22.15: तुम्हें श्री रामचन्द्रजी का कार्य निःसंदेह करना चाहिए। ऐसा न करने से तुम्हें पाप लगेगा और यदि तुम्हारा अपमान हुआ तो श्री रामचन्द्रजी तुम्हारा वध कर देंगे। 15॥   |   ramayan सर्ग 4.22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 22: वाली का सुग्रीव और अङ्गद से अपने मन की बात कहकर प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.22.15 
राघवस्य च ते कार्यं कर्तव्यमविशङ्कया।
स्यादधर्मो ह्यकरणे त्वां च हिंस्यादमानित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें श्री रामचन्द्रजी का कार्य निःसंदेह करना चाहिए। ऐसा न करने से तुम्हें पाप लगेगा और यदि तुम्हारा अपमान हुआ तो श्री रामचन्द्रजी तुम्हारा वध कर देंगे। 15॥
 
You should do Shri Ramchandraji's work without any doubt. By not doing it, you will feel guilty and if you are insulted, Shri Ramchandraji will kill you. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)