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ramayan 4.21.6: 'यही वानरराज, जिस पर सैकड़ों, हजारों और लाखों वानर जीवन-निर्वाह हेतु निर्भर रहते थे, आज अपने प्रारब्धानुसार अपनी आयु पूरी कर चुका है॥6॥   |   ramayan सर्ग 4.21: हनुमान जी का तारा को समझाना और तारा का पति के अनुगमन का ही निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 21: हनुमान जी का तारा को समझाना और तारा का पति के अनुगमन का ही निश्चय करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.21.6 
यस्मिन् हरिसहस्राणि शतानि नियुतानि च।
वर्तयन्ति कृताशानि सोऽयं दिष्टान्तमागत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'यही वानरराज, जिस पर सैकड़ों, हजारों और लाखों वानर जीवन-निर्वाह हेतु निर्भर रहते थे, आज अपने प्रारब्धानुसार अपनी आयु पूरी कर चुका है॥6॥
 
‘This very monkey king, on whom hundreds, thousands and lakhs of monkeys used to depend for their lives, has today completed the period of his lifespan as per his destiny.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)