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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 21: हनुमान जी का तारा को समझाना और तारा का पति के अनुगमन का ही निश्चय करना
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श्लोक 12
श्लोक
4.21.12
सा तस्य वचनं श्रुत्वा भर्तृव्यसनपीडिता।
अब्रवीदुत्तरं तारा हनूमन्तमवस्थितम्॥ १२॥
अनुवाद
तारा अपने पति के वियोग के दुःख से पीड़ित थी। उपरोक्त वचन सुनकर वह सामने खड़े हनुमानजी से बोली-
Tara was suffering from the grief of separation from her husband. On hearing the above words, she spoke to Hanumanji standing in front of her-
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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