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ramayan 4.21.10: शास्त्रों में संतान प्राप्ति का जो भी उद्देश्य बताया गया है तथा राजा बालि के आध्यात्मिक कल्याण के लिए जो भी कर्तव्य इस समय अपेक्षित है, उसे करो - यही इस समय का निश्चित निर्देश है॥10॥   |   ramayan सर्ग 4.21: हनुमान जी का तारा को समझाना और तारा का पति के अनुगमन का ही निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 21: हनुमान जी का तारा को समझाना और तारा का पति के अनुगमन का ही निश्चय करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.21.10 
संततिश्च यथा दृष्टा कृत्यं यच्चापि साम्प्रतम्।
राज्ञस्तत् क्रियतां सर्वमेष कालस्य निश्चय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
शास्त्रों में संतान प्राप्ति का जो भी उद्देश्य बताया गया है तथा राजा बालि के आध्यात्मिक कल्याण के लिए जो भी कर्तव्य इस समय अपेक्षित है, उसे करो - यही इस समय का निश्चित निर्देश है॥10॥
 
Do whatever purpose of having a child is explained in the scriptures and whatever duty is required at this time for the spiritual welfare of the King Vali - this is the definite instruction of the time.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)