vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना
»
श्लोक 26
श्लोक
4.2.26
ममैवाभिमुखं स्थित्वा पृच्छ त्वं हरिपुङ्गव।
प्रयोजनं प्रवेशस्य वनस्यास्य धनुर्धरौ॥ २६॥
अनुवाद
हे वानरशिरोमणि! तुम मेरे सामने खड़े होकर उन वीर धनुर्धरों से इस वन में प्रवेश करने का कारण पूछो॥ 26॥
O Vanarashiromaane! You stand facing me and ask those brave archers the reason for entering this forest.॥ 26॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×