वालिप्रणिहितावेव शङ्केऽहं पुरुषोत्तमौ।
राजानो बहुमित्राश्च विश्वासो नात्र हि क्षम:॥ २१॥
अनुवाद
मेरे मन में संदेह है कि कहीं ये दोनों महापुरुष स्वयं बालि के भेजे हुए तो नहीं हैं; क्योंकि राजाओं के मित्र बहुत होते हैं, अतः उन पर विश्वास करना उचित नहीं है॥ 21॥
‘I have a doubt in my mind whether these two great men have been sent by Vali himself; because kings have many friends. Therefore, it is not right to trust them.॥ 21॥