श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव तथा वानरों की आशङ्का, हनुमान्जी द्वारा उसका निवारण तथा सुग्रीव का हनुमान जी को श्रीराम-लक्ष्मण के पास उनका भेद लेने के लिये भेजना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.2.11 
आप्लवन्तो हरिवरा: सर्वतस्तं महागिरिम्।
मृगमार्जारशार्दूलांस्त्रासयन्तो ययुस्तदा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस समय वे महान वानर सब दिशाओं से उस महान पर्वत की ओर कूद रहे थे, जिससे वहाँ रहने वाले हिरण, बिल्लियाँ और बाघ भयभीत हो रहे थे।
 
At that time, those great monkeys were jumping towards that great mountain from all directions, frightening the deer, cats and tigers living there.
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