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ramayan 4.19.24: यदि गरुड़ ने किसी छिपे हुए सर्प को पकड़ने के लिए किसी चैत्य वृक्ष को या किसी सर्वपूजित मंदिर को, जहाँ ध्वजा फहराई जाती है और जिसके पास देवता की वेदी सुशोभित होती है, नष्ट कर दिया होता, तो वहाँ जो दुर्दशा होती, वही आज बालि की हो रही है (तारा ने यह सब देखा)।   |   ramayan सर्ग 4.19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.19.24 
अर्चितं सर्वलोकस्य सपताकं सवेदिकम्।
नागहेतो: सुपर्णेन चैत्यमुन्मथितं यथा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यदि गरुड़ ने किसी छिपे हुए सर्प को पकड़ने के लिए किसी चैत्य वृक्ष को या किसी सर्वपूजित मंदिर को, जहाँ ध्वजा फहराई जाती है और जिसके पास देवता की वेदी सुशोभित होती है, नष्ट कर दिया होता, तो वहाँ जो दुर्दशा होती, वही आज बालि की हो रही है (तारा ने यह सब देखा)।
 
If Garuda had destroyed a Chaitya tree or a temple that is worshipped by all, where a flag is hoisted and near which an altar of the deity is adorned, in order to catch a snake hidden there, then the same plight that would have been seen there is the same condition that Vali is facing today (Tara saw all this).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)