Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.19.20: ऐसा कहकर तारा शोक से विह्वल हो गई और रोती हुई तथा वेदना से अपने सिर और छाती को दोनों हाथों से पीटती हुई बहुत तेजी से भागी।   |   ramayan सर्ग 4.19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.19.20 
एवमुक्त्वा प्रदुद्राव रुदती शोकमूर्च्छिता।
शिरश्चोरश्च बाहुभ्यां दु:खेन समभिघ्नती॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर तारा शोक से विह्वल हो गई और रोती हुई तथा वेदना से अपने सिर और छाती को दोनों हाथों से पीटती हुई बहुत तेजी से भागी।
 
Having said this, Tara, overwhelmed with grief, ran very fast, weeping and beating her head and chest with both her hands in anguish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)