श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 19: अङ्गद सहित तारा का भागे हुए वानरों से बात करके वाली के समीप आना और उसकी दुर्दशा देखकर रोना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.19.17 
अल्पान्तरगतानां तु श्रुत्वा वचनमङ्गना।
आत्मन: प्रतिरूपं सा बभाषे चारुहासिनी॥ १७॥
 
 
अनुवाद
थोड़ी ही दूर पर आए हुए वानरों से यह बात सुनकर सुन्दर मुस्कुराती हुई कल्याणी तारा ने उन्हें अपने ढंग से उत्तर दिया-॥17॥
 
On hearing this from the monkeys who had just come a short distance away, the beautiful smiling Kalyani Tara gave them an answer in her own way -॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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