श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.18.8 
नयश्च विनयश्चोभौ यस्मिन् सत्यं च सुस्थितम्।
विक्रमश्च यथा दृष्ट: स राजा देशकालवित् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
जिसमें नीति, शील, सत्य और पराक्रम आदि सभी राजसी गुण यथावत् विद्यमान दिखाई देते हैं, वह देश, काल और काल के तत्त्वों को जानने वाला राजा है (ये सभी गुण भरत में विद्यमान हैं)। 8॥
 
The one in whom all the royal qualities like policy, modesty, truth and bravery etc. are seen to be present as they are, is the king who knows the elements of time, space and time (all these qualities are present in Bharat). 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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