Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.18.7: ‘धर्मात्मा राजा भरत इस पृथ्वी पर राज्य करते हैं। वे सत्यवादी, सरल और धर्म, अर्थ और काम के तत्त्व को जानने वाले हैं; इसलिए वे दुष्टों को वश में करने और सज्जनों पर दया करने में सदैव तत्पर रहते हैं।॥7॥ | ramayan सर्ग 4.18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘धर्मात्मा राजा भरत इस पृथ्वी पर राज्य करते हैं। वे सत्यवादी, सरल और धर्म, अर्थ और काम के तत्त्व को जानने वाले हैं; इसलिए वे दुष्टों को वश में करने और सज्जनों पर दया करने में सदैव तत्पर रहते हैं।॥7॥
‘The virtuous king Bharat rules this earth. He is truthful, simple and knows the essence of Dharma, Artha and Kama; hence he is always ready to control the wicked and show mercy to the virtuous.॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥