Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.18.66: ‘प्रभु! हे देवराज इन्द्र के समान पराक्रम दिखाने वाले, हे नरदेव! आपके बाण से घायल होकर मैं मूर्छित हो गया था। अतः मैंने अनजाने में आपसे जो कटु वचन कहे हैं, उनके लिए आप मुझे क्षमा करें। इसके लिए मैं प्रार्थना करके आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ।’॥66॥ | ramayan सर्ग 4.18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘प्रभु! हे देवराज इन्द्र के समान पराक्रम दिखाने वाले, हे नरदेव! आपके बाण से घायल होकर मैं मूर्छित हो गया था। अतः मैंने अनजाने में आपसे जो कटु वचन कहे हैं, उनके लिए आप मुझे क्षमा करें। इसके लिए मैं प्रार्थना करके आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ।’॥66॥
‘Prabhu! O lord of men who display a mighty power like that of Devraj Indra! I had become unconscious due to being hit by your arrow. Therefore, please forgive me for the harsh words I have unknowingly spoken to you. For this, I want to please you by praying.’॥ 66॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डेऽष्टादश: सर्ग:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें अठारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥