श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.18.6 
इक्ष्वाकूणामियं भूमि: सशैलवनकानना।
मृगपक्षिमनुष्याणां निग्रहानुग्रहेष्वपि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘पहाड़ों, वनों और जंगलों सहित यह सम्पूर्ण पृथ्वी इक्ष्वाकुवंश के राजाओं की है; अतः यहाँ के पशु, पक्षी और मनुष्यों पर दया करने तथा उन्हें दण्ड देने का अधिकार भी उन्हीं को है ॥6॥
 
‘This entire earth with its mountains, forests and jungles belongs to the kings of the Ikshvaku dynasty; hence they have the right to show mercy to the animals, birds and humans here and also to punish them. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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