श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.18.52 
बालश्चाकृतबुद्धिश्च एकपुत्रश्च मे प्रिय:।
तारेयो राम भवता रक्षणीयो महाबल:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! वह अभी बालक है। उसकी बुद्धि अभी परिपक्व नहीं हुई है। मेरा एकमात्र पुत्र होने के कारण ताराकुमार अंगद मुझे अत्यंत प्रिय है। कृपया मेरे उस महाबली पुत्र की रक्षा करें॥ 52॥
 
Shri Ram! He is still a child. His intellect has not matured. Being my only son, Tarakumar Angad is very dear to me. Please protect that mighty son of mine.॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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