Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.18.5: सौम्य! गुरुजनों द्वारा पूजित बुद्धिमान वृद्ध पुरुषों से परामर्श लिए बिना, उनसे धर्म का स्वरूप समझे बिना, क्या तुम यहाँ बंदर की तरह चंचलता से मुझे उपदेश देना चाहते हो? अथवा मेरी निन्दा करना चाहते हो?॥5॥ | ramayan सर्ग 4.18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौम्य! गुरुजनों द्वारा पूजित बुद्धिमान वृद्ध पुरुषों से परामर्श लिए बिना, उनसे धर्म का स्वरूप समझे बिना, क्या तुम यहाँ बंदर की तरह चंचलता से मुझे उपदेश देना चाहते हो? अथवा मेरी निन्दा करना चाहते हो?॥5॥
Soumya! Without consulting the wise old men respected by the teachers, without understanding the nature of religion from them, do you want to preach to me here with the fickleness of a monkey? Or do you want to criticize me? ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥