Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.18.42: अतः तुम उनकी निन्दा न करो, उनकी निन्दा भी न करो, उनकी निन्दा भी न करो और उनके लिए अप्रिय वचन भी न कहो; क्योंकि वे साक्षात् देवता हैं जो मनुष्य रूप धारण करके इस पृथ्वी पर विचरण करते रहते हैं॥ 42॥ | ramayan सर्ग 4.18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तान् न हिंस्यान्न चाक्रोशेन्नाक्षिपेन्नाप्रियं वदेत्।
देवा मानुषरूपेण चरन्त्येते महीतले॥ ४२॥
अनुवाद
अतः तुम उनकी निन्दा न करो, उनकी निन्दा भी न करो, उनकी निन्दा भी न करो और उनके लिए अप्रिय वचन भी न कहो; क्योंकि वे साक्षात् देवता हैं जो मनुष्य रूप धारण करके इस पृथ्वी पर विचरण करते रहते हैं॥ 42॥
‘Therefore do not harm them, do not criticise them, do not even criticise them and do not even say unpleasant words to them; because they are actually gods who keep roaming on this earth in human form.॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥