श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.18.36 
शृणु चाप्यपरं भूय: कारणं हरिपुंगव।
तच्छ्रुत्वा हि महद् वीर न मन्युं कर्तुमर्हसि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे वानर! अपने वध का दूसरा कारण सुनो। वीर! उस महान कारण को सुनकर तुम्हें मुझ पर क्रोध नहीं करना चाहिए। 36.
 
O monkey-head! Listen to the other reason for your killing. Brave! After hearing that great reason, you should not be angry with me. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)