श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.18.28 
तदेभि: कारणै: सर्वैर्महद्भिर्धर्मसंश्रितै:।
शासनं तव यद् युक्तं तद् भवाननुमन्यताम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ये सब धर्मसम्मत महान कारण एक साथ आ गए हैं, जिनके कारण तुम्हें उचित दण्ड देने के लिए विवश होना पड़ा है। तुम्हें भी इसका अनुमोदन करना चाहिए॥28॥
 
All these great reasons in accordance with Dharma have come together due to which you have been forced to give appropriate punishment. You should also approve of this.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)